May 29, 2024

Health

इंटरनेट डेस्क। बहुत से लोगों को बिना स्लीव यानी स्लीवलेस कपड़े पहना पंसद होता है, लेकिन कुछ लोग अंडर आर्म्स के कालेपन की समस्या के कारण ऐसा नहीं कर पाते हैं। इसके कारण उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है।

इस प्रकार की परेशानी होने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें बहुत अधिक पसीना आना, डेड स्किन सेल्स का जमा हो जाना, टाइट कपड़े पहनने के कारण स्किन का रगड़ खाना , शेविंग आदि कारण शामिल हैं। आज हम आपको इस परेशानी को दूर करने के लिए कुछ घरेलू उपायों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। आप इन्हें अपनाकर इस परेशानी से जल्द ही छूटकारा पा सकते हैं।

नींबू का रस:
इस परेशानी का दूर करने के लिए नींबू बहुत ही उपयोगी है। नींबू का रस ब्लैक अंडर आर्म से छुटकारा दिलाने में सहायक है। इसके लिए आप नींबू के रस को कुछ देर तक अंडर आर्म्स पर लगा लें। इसके बाद पानी से इसे धो लें। ये उपाय करने से स्किन पर जमा डेड सेल्स को हटाने में सहायता मिलेगी।

एलोवेरा जेल:
एलोवेरा जेल भी हमारी तत्वा के लिए कई प्रकार से लाभकारी होती है। आप इसकी पत्तियों को काटकर छील लें। इसके बाद आप इसके स्लाइस काटकर इनसे थोड़ी देर अंडर आर्म्स की मसाज करें और फिर इसे आधे मिनट के लिए छोड़ दें। सूखने पर इसे गुनगुने पानी से धो लें। एक सप्ताह तक लगातार ऐसा करने से आपकी ये परेशानी दूर हो जाएगी। इस उपाय से त्वचा का कलर नॉर्मल होने के साथ-साथ स्किन टोन्ड भी हो जाएगी।

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इंटरनेट डेस्क। खराब लाइफस्टाइल के कारण लोगों को बालों से जुड़ी कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ जाता है। आप घरेलू उपाय से भी बालों से जुड़ी परेशानी को दूर कर सकते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि मेथी दाने भी बालों के लिए कई प्रकार से लाभकारी होते हैं।

इसमें प्रोटीन और विटामिन-सी मिलता है, जो स्कैल्प को हेल्दी बनाए रखने के साथ-साथ बालों को नेचुरली काला, लंबा और घना बनाए रखने में उपयोगी है। मेथी दाना में आयरन की भरपूर मात्रा मिलती है, जो ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करने में बहुत ही उपयोगी है।

ऐसा होने से बालों को अंदरूनी पोषण मिलता है। मेथी में मौजूद पोटैशियम और निकोटिन भी मिलते हैं जो बालों को अंदरूनी पोषण देकर असमय सफेद होते बालों से छुटकारा दिलाने में सहायक है। आप मेथी दानों को पीसकर उसमें सरसों का तेल मिलाकर एक सिरम बना लें। अब आप इसका नियमित रूप से बालों पर उपयोग करें।

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इंटरनेट डेस्क। सेहत के लिए विटामिन बहुत ही जरूरी है। अगर शरीर में पर्याप्त रूप से विटामिन नहीं हैं तो आपको कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। विटामिन की कमी त्वचा से जुड़ी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।

आज हम आपको विटामिन सी के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। विटामिन सी त्वचा के लिए भी बहुत ही उपयोगी है। ये चेहरे की खूबसूरती को बढ़ाने में भी उपयोगी है। पुरुषों में प्रतिदिन 90 मिलीग्राम और महिलाओं में 75 मिलीग्राम विटामिन सी जरूर ही लेना चाहिए।

नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी लेकर आप स्किन टोंड और ग्लोइंग बना सकते हैं। इसी कारण आपको विटामिन सी से भरपूर खट्टे फलों का सेवन करने चाहिए। आंवला, कीनू ,नींबू, संतरा, मुसम्मी, टमाटर, हरी और लाल मिर्च और हरी आदि में भरपूर मात्रा में विटामिन सी मिलता है। आपको आज से ही इन चीजों को डाइट में शामिल कर लें।

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Last December, Khalid Shaikh missed 20 days of school and had to be hospitalised for nearly two weeks, as he battled a serious bout of typhoid that gave him fever, splitting headaches, stomach and body pain.

His family spent Rs 1 lakh on his treatment.

The 15-year-old and his friend had eaten food from a street vendor. Both ended up with typhoid, a water-borne disease caused by the bacteria Salmonella Typhi that attacks multiple organs, causes vomiting and, in rare cases, leads to death. The bacteria spreads through contaminated food and water, often in unsanitary environments.

India accounts for more than half of the global typhoid burden.

When Shaikh first developed a headache and stomach ache, a local doctor prescribed antibiotics. Then followed high fever that recurred every four hours. He was admitted to a hospital in Jogeshwari, a western suburb of Mumbai. When his fever did not subside, his parents shifted him to the Kokilaben Dhirubhai Ambani hospital.

“The doctors there suspected typhoid,” his mother Shabina Shaikh said. The teenager was given a strong dose of antibiotics because milder ones did not work on him. Twenty days after discharge, the typhoid relapsed. This time, he was in hospital for three more days.

Shaikh is a classic example of antimicrobial resistance, a condition…

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इंटरनेट डेस्क। आज के समय में लोगों को भागदौड़ करनी पड़ती है और तनाव का सामना करना पड़ता हैं, साथ ही कई तरह के बाजार के फूड भी खाने पड़ते है। ऐसे में लोग कोलेस्ट्रॉल का शिकार हो जाते हैं और हार्ट पेशेंट बन जाते हैं, लेकिन आप अगर कुछ सुपर फूड का सेवन करना शुरू कर दो तो आप इस समस्यां से छुट्टी पा सकते है।

अंकुरित दालें
आपको कोलेस्ट्रॉल को कम करना हैं तो आपको मूंग, चना,उड़द, राजमा और सोयाबीन का अंकुरित सलाद या चाट खाना चाहिए। यह हमारे पाचन शक्ति को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है और साथ ही कब्ज की समस्या से छुटकारा दिलाता है और कोलेस्ट्रॉल की समस्या को दूर करता है।

बादाम का सेवन करें
इसके साथ ही आप रोजाना 6 बादाम रात को भिंगोकर रख दें और सुबह इसे खाएं। बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में ये बहुत ही कारगर है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर, प्रोटीन और ओमेगा थ्री फैटी एसिड पाया जाता है। जो आपके कोलेस्ट्रॉल को कम करता है।

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इंटरनेट डेस्क। काम का बोझ ओर उसके साथ में घर की जिम्मेदारी लोगों को कई तरह का तनाव दे देती हैं। ऐसे में आप भी इस भागदौड़ में लगंे हैं और आप भी किसी तरह के तनाव में हैं तो आपको कई समस्याएं होने लगती है। ऐसे में आप भी अगर कुछ ड्रिंक का सेवन करते है तो आपकों तनाव से मुक्ति मिल सकती है। तो जानते हैं इसके बारे में

ग्रीन टी का सेवन
आपकों अगर तनाव है और आप परेशान हैं तो आपको ग्रीन टी का सेवन करना चाहिए। यह बहुत ही फायदे की चीज है। ग्रीन टी में एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते है जो मस्तिष्क के लिए गुणकारी है। इसके सेवन से आपका तनाव कंट्रोल हो सकता है।

गर्म दूध
इसके अलाव आप राम में सोने से पहले गर्म दूध का सेवन भी कर सकते है। ऐसे में आप चाहे तो गर्म दूध का सेवन करके भी तनाव को दूर सकते है। गर्म दूध पीने से मानसिक तनाव कम होता है। दूध में ट्रिप्टोफेन अमीनो एसिड पाया जाता है, जो आपकी नींद को बेहतर बनाता है।

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इंटरनेट डेस्क। एलोवेरा हमारी सेहत के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि एलोवेरा हमारे चेहरे की खूबसूरती को भी बढ़ा देता है। इसका उपयोग कर आप त्वचा ये जुड़ी कई प्रकार की परेशानियों से राहत पा सकते हैं।

अगर आप डार्क सर्कल्स की परेशानी सामना कर रहे हैं तो आज ही एलोवेरा का उपयोग करना शुरू कर दें। डिहाइड्रेशन यानी त्वचा में नमी के कारण लोगों को चेहरे पर डार्क सर्कल्स का सामना करना पड़ता है। एलोवेरा एक प्राकृतिक मॉश्चराइजर के रूप में त्वचा पर कार्य करता है।

इसका उपयोग करने से त्वचा पर नमी बनी रहती है और ये संक्रमण से भी बचाव करता है। आप इसका नियमित रूप से उपयोग कर डार्क सर्कल की परेशानी को धीरे-धीरे खत्म कर सकते हैं। वहीं इसका सेवन करने से व्यक्ति को सेहत से जुड़े कई प्रकार के लाभ मिलते हैं। आपको आज से ही एलोवेरा का उपयोग करना शुरू कर देना चाहिए।

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इंटरेनट डेस्क। खीरा हमारी सेहत ही नहीं त्वचा, बालों और नाखूनों के लिए गुणकारी होता है। इसका सेवन किसी भी मौसम में किया जा सकता है। सर्दियों में भी ये हमारी सेहत के लिए कई प्रकार से उपयोगी होता है। अक्सर वातावरण में नमी कम होने के कारण त्वचा और बालों से जुड़ी कई समस्याओं का लोगों को सामना करना पड़ जाता है।

ऐसे में खीरे का सेवन कर आप इन समस्याओं से राहत पा सकते हैं। खीरे में सिलिका मिलता है, जो बालों और नाखूनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। खीरे में मिलने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण प्राकृतिक रूप से हमारी त्वचा के लिए बहुत ही लाभकारी होते हैं।

इसका सेवन करने से त्वचा में चमक आती है। चेहरे की खूबूसरती बढ़ जाती है। इसके अलावा भी खीरे का सेवन करने से व्यक्ति को त्वचा से जुड़ी कई प्रकार की परेशानियों से राहत मिलती है। आप आज ही इसका सेवन करना शुरू कर दें।

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इंटरनेट डेस्क। सर्दियों के मौसम की शुरूआत हो चुकी है और उसके साथ ही अब लोगों को कई तरह कर परेशानियों का सामना भी करना पड़ेगा। इस मौसम में बड़ों से लेकर बच्चों तक को खांसी जुकाम जैसी कई छोटी मोटी बीमारिया होने लगती है। ऐसे में आप समय रहते इसका उपचार ले लेते है तो आपके लिए सही रहता है। ऐसे में आपको ये लक्षण दिखे तो डॉक्टर से संपर्क कर सकते है।

सर्दी खांसी के लक्षण
कई बार चेस्ट इंफेक्शन हो जाने के बाद भी हम खासंते रहते है और इसे सर्दी खांसी के लक्षण समझ लेते है। लेकिन कभी ये गलती नहीं करनी चाहिए। जैसे ही हल्का बुखार, शरीर में दर्द, खांसी और कमजोरी दिखे तो तो ये छाती के संक्रमण हो सकते है। ऐेसे में आपकों ये लक्षण दिखे तो डॉक्टर से सलाह ले।

चेस्ट इंफेक्शन के लक्षण
इसके साथ ही आपको बता दें की चेेस्ट इंफेक्शन होने पर आपको कफ आना शुरू हो जाता है। संक्रमण के कारण ब्रोन्कियल ट्यूब में सूजन आ जाती है जो आगे जाकर परेशानी पैदा कर सकती है।

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People who have recently had a heart attack are often prescribed clopidogrel, a medication that decreases the risk of having another heart attack. While the drug is very effective at preventing subsequent heart attacks, it can only work if it’s activated by the body’s CYP2C19 enzyme. Certain genetic variations mean the body can’t activate clopidogrel, because it can’t make this enzyme.

An inability to activate clopidogrel is actually very common. An estimated one in three people of European ancestry has one of these genetic variants – and they are even more common in some ethnic groups.

For example, more than nine in every ten Indigenous people of the Pacific islands have one of these genetic variants. So, they probably have a greater risk of subsequent heart attack if prescribed clopidogrel. However, studies linking the genetic variants with real-world health data have not been done in many non-European populations.

Our new study has also shown that clopidogrel may not be effective for many British south Asians. This is significant, as south Asian people suffer from high rates of cardiovascular disease in the UK.

Genetic variants

We began our study by analysing data from 44,396 participants who’d participated in Genes & Health – a study of British-Pakistani and British-Bangladeshi people, which has linked genetic data with national records of health problems and prescriptions.

We found that nearly six in…

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Climate change, a high prevalence of chronic diseases and alarming levels of physical inactivity are three of the central challenges we face in the 21st century.

The increased frequency, duration and intensity of heat waves is one of the undeniable signs that climate change is well underway. According to the various climate scenarios, by the end of the century between half and three-quarters of the world’s population will be exposed to lethal heat for more than 20 days per year.

The future impact of extreme heat events will depend on the extent of climate change, but also on our ability to adapt to it by becoming less sensitive and vulnerable to heat, and therefore more resilient. As researchers in physical activity science and environmental physiology, we are assessing how adopting an active lifestyle can make us better equipped to cope with rising global temperatures.

How can the human body combat heat?

When exposed to heat, the body deploys several responses to try to dissipate it. The first is conscious and depends on behavioural decisions we make to minimize exposure, such as seeking a cool place, switching on a fan or reducing our physical activity.

Secondly, if these strategies are not sufficient, the brain activates physiological responses that are beyond our control;…

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इंटरनेट डेस्क। आप सुबह शाम किसी ना किसी एक समय पर तो दूध पीते ही होंगे। लेकिन क्या आपको यह पता है की आप रात के समय जो दूध पीकर सोते है या फिर नहीं पीते है इसके क्या लाभ होते है। अगर आपको पता नहीं है तो आज आपको बता रहे है की दूध पीने से क्या फायदा होता है।

पाचन तंत्र सही रहता है

अगर आप हर रोज रात को दूध पीकर सोते है तो यह आपके लिए बड़े ही फायदे की चीज है। रोजाना रात को गर्म दूध पीने से पाचन तंत्र की समस्या ठीक होती है और इससे पाचन तंत्र तो दुरुस्त होता ही है। साथ ही मल त्यागने में आसानी होती है।

हड्डियों को मजबूती मिलती है
अगर आप रात को सोते समय दूध पीते है तो इससे आपकी हड्डिया भी मजबूत होती है। दूध में कैल्शियम के अलावा फास्फोरस, विटामिन डी और प्रोटीन होता है जो हड्डियों को मजबूती देता है।

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इंटरनेट डेस्क। आप चाय के दीवाने है तो यह आपको कोई गंभीर बीमारी भी दे सकती है। ऐसा इसलिए की आप अगर इसका सेवन बेहिसाब करते है तो फिर इसके परिणाम गलत भी हो सकते है। ऐसे में आपको चाय का सेवन तो करना ही नहीं चाहिए। अगर करते है तो आप इसके नुकसान भी जान ले।

नींद प्रभावित हो सकती है
आप अगर चाय का सेवन अधिक मात्रा में करते है तो यह आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है। ऐसा इसलिए की इसमें कैफीन की मात्रा बहुत ज्यादा पाई जाती है। जिसकी ज्यादा मात्रा शरीर में पहुंचने से नींद की समस्या हो सकती हैं। कैफीन मेलाटोनिन उत्पादन को रोक सकता है और इससे नींद खराब हो सकती है।

दिल में जलन
आप चाय का ज्यादा शौक रखते है तो इसमें मौजूद कैफीन शरीर में पहुंचने पर दिल में जलन जैस समस्या पैदा कर सकता है। रिसर्च की माने तो कैफीन की वजह से पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ सकता है। इससे हार्ट बर्न की परेशानी हो सकती है।

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इंटरनेट डेस्क। हरी मिर्च आपको हर किसी घर में मिल जाएगी। इंडियन घरों में इसके बिना सब्जी में छोंक अधूरा रहता है। ऐसे कई लोग इसे कच्ची खाना तो कई इसे फ्राई करके खाना पसंद करते है। लेकिन आप अगर इसका सेवन नहीं करते है तो आपको इसका सेवन शुरू कर देना चाहिए। इसका कारण यह है की इससे आपको कई लाभ होंगे।

हरी मिर्च खाने के फायदे

नंबर 1
अगर आप हरी मिर्च का सेवन करते है तो आपको दर्द में आराम मिल सकता है। हालांकि आपको अगर दर्द अर्थराइटिस का है तो जल्द आराम मिल सकता है। दरअसल इसमें मौजूद कैप्साइसिन नाम का कंपाउंड दर्द से मुक्ति दिलाता है।

नंबर 2
अगर आप हरी मिर्च का सेवन करते है तो आपको दिल को हेल्दी रखने में भी फायदा मिलता है। अगर आप नियमित रूप से हरी मिर्ची का सेवन करते है तो इससे एथेरोस्क्लेरोसिस जैसी बीमारी, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम किया जा सकता है।

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इंटरनेट डेस्क। देश की सरकार की और से लोगों के लिए कई तरह की योजनाओं को संचालन किया जा रहा है। इन्हीं योजनाओं में से एक है आयुष्मान कार्ड योजना, जिसका पिछले दिनों नाम बदलकर आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना-मुख्यमंत्री योजना कर दिया गया है। इस योजना में लोगों को पांच लाख तक का इलाज मुफ्त में मिलता है। तो जानते है इस योजना के बारे में।

योजना को जानें
आयुष्मान योजना को केंद्र सरकार चलाती है और मौजूदा समय में कुछ राज्य सरकारें भी इस योजना को चला रही हैं। योजना के अंतर्गत पात्र लोगों के पहले आयुष्मान कार्ड बनाए जाते हैं, जिसके बाद इस कार्ड के जरिए कार्डधारक सूचीबद्ध अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का मुफ्त में इलाज करवा सकते है।

किन लोगों को बन सकता है कार्ड

कोई दिहाड़ी मजदूर हो
आपका मकान कच्चा हो
निराश्रित या फिर आदिवासी हो
आप ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं
भूमिहीन व्यक्ति हो
परिवार में अगर कोई दिव्यांग सदस्य हो

इसके साथ ही आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र जाना होगा और वहां जाकर पंजीकरण करवाना होता है।

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इंटरनेट डेस्क। आपने भी करी पत्ता के बारे में जरूर सुना होगा। इसका कारण यह है की ये हर घर में आज के समय में आसानी से मिल जाता है। ये आपके खाने का स्वाद तो बढ़ाता ही है साथ ही आपकी हेल्थ के लिए भी बड़ा फायदेमंद रहता है। अगर आप वेट लॉस करना चाहते हैं तो आप इसके पत्तो का जूस बनाकर भी पी सकते है।

वजन घटाने में फायदेमंद
आप वेट घटाने के लिए खूूब मेहनत कर रहे होंगे। लेकिन आप करी पत्ते का जूस पी सकते हैं तो आपका वेट जल्द कम हो सकता है। इसके लिए आपको खाली पेट करी पत्ते का जूस पीना होगा। इसमें मौजूद फाइबर आपको लंबे समय तक भूख का एहसास नहीं होने देंगे।

टॉक्सिंस निकल जाएंगे
करी पत्ते का जूस आप अगर नियमित रूप से पीते है तो आपके शरीर से हानिकारक टॉक्सिंस निकल जाते हैं। ये आपके शरीर को नेचुरली डिटॉक्सिफाई करते। आपका पाचन सुधर जाएगा। इससे कब्ज और एसिडिटी में भी राहत मिलती है।

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इंटरनेट डेस्क। आप भी हाल ही में मां बनी है और आपको बेबी हुआ है तो आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की बहुत जरूरत है। ऐसे में आपको डिलीवरी के बाद भी पौष्टिक भोजन करना चाहिए जिससे आपको किसी तरह की कोई समस्या न हो। ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसी चीजे बता रहे है जिन्हें आप डाइट में शामिल कर सकती है जो बड़ी फायदेमंद होती है।

मेथी दाना
आपको अपनी डाइट में मेथी दाना को शामिल करना चाहिए। यह कई बीमारियों में फायदा देता है। साथ ही साथ नई माओं को इसका सेवन करना ही चाहिए। इससे आपको एनर्जी तो मिलेगी ही साथ ही साथ ब्रेस्टमिल्क के प्रोडक्शन को भी बढ़ावा मिलेगा।

जीरा
इसके साथ ही आप डाइट में जीरा भी शामिल करें। इसमें एंटीऑक्सीडेंट के साथ-साथ आयरन होता है। इसका सेवन करने से कमजोरी से राहत मिलती है। साथ ही ब्रेस्टमिल्क प्रोडक्शन में फायदा होता है।

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इंटरनेट डेस्क। अगर आपका पेट सही नहीं रहता है तो आपको कई तरह की समस्याए घेर लेती है। इसका कारण है की आपका पाचन सही नहीं है। पाचन सही नहीं होने के कारण ही आपको शरीर में कई तरह की बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में जब आपका पाचन तंत्र खराब होने लगता है तो शरीर कई तरह संकेत देता है। ऐसे में जानते है उनके बारे मंे।

नींद नहीं आना
आगर आपका पाचन तंत्र दुरुस्त नहीं है आपको खाना पच नहीं रहा है तो आपको नींद भी सही से नहीं आएगी। कई बार खाना नहीं पचता है तो इससे पेट भारी हो जाता है, डकार आती है गैस बनती है और सिर दर्द की समस्या हो जाती है। ऐसे में आपको नींद नहीं आती है।

त्वचा से संबंधित विकार
पेट साफ नहीं होने की स्थिति में आपको त्वचा से संबंधित समस्याएं होने लगती है। नियमित रूप से मल नहीं त्याग पा रहे हैं या खाना नहीं पच रहा है तो चेहरे पर पिंपल, एक्ने की समस्या हो सकती है। साथ ही ऑइली स्किन की समस्या बढ़ सकती है।

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इंटरनेट डेस्क। कोई भी बीमारी होने पर हमारा शरीर हमे जरूर संकेत देता है। अगर हम उनको थोड़ा भी समझ जाते है तो डॉक्टर से मिलकर इलाज ले सकते है। ऐसे में हाई यूरिक एसिड भी एक गंभीर समस्या है, जो लोगों में ज्यादा दिखाई देने लगी है। ऐसे में अगर आपको भी आज हम बता रहे है ऐसे संकेत दिखे तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए।

यूरिन से आती है बहुत तेज गंध
आपके शरीर में यूरिक एसिड बढ़ जाने पर आप जब यूरिन पास करते है तो बहुत तेज गंध आने लगती है। ऐसे में आपको इसे नजरअंदाज नहीं करना है और आपको डॉक्टर से संपर्क करना है। यह यूरिक एसिड बढ़ने की निशानी हो सकती है।

बार बार यूरिन आता है
इसके साथ ही जब यूरिक एसिड बढ़ता है तो बार बार आपको यूरिन आने लगता है। यूरिक एसिड बढ़ जाता है तो किडनी अपना काम ठीक से नहीं कर पाता है। इस वजह से बार बार यूरिन करने की इच्छा होती है। साथ ही आपके जोड़ों में दर्द, सूजन की बीमारी भी शुरू हो जाती है।

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For families that had a member with a mental illness, nearly a fifth of household monthly expenditure is spent on healthcare, on average, finds a study published in March 2023. Because of out-of-pocket expenditure on healthcare, about 21% of these households dropped below the poverty line, the study found.

The study, “Catastrophic Health Expenditure and Poverty Impact Due to Mental Illness in India” published in the Journal of Health Management, highlights the financial impact of mental healthcare and the need for financial risk protection for households with members suffering from mental illness.

The study uses data from the 76th round of the National Sample Survey conducted between July and December 2018. During the survey, 6,679 households self-reported a person with mental illness as part of the Persons with Disabilities in India Survey.

Prevalence of mental illness

In 2016, the National Mental Health Survey by the National Institute of Mental Health and Neuro Sciences, estimated that about 10.6% of India’s population, above 18 years, lived with a mental health condition. This excludes tobacco use disorders but includes other substance use disorders.

IndiaSpend has reached out to the director of National Institute of Mental Health and Neuro Sciences, Dr Pratima Murthy, for more information on the prevalence of mental health disorders, as well as the…

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Given that India is currently quite dependent on the private healthcare sector, the lack of effective regulation and standardisation has widespread consequences which affect every segment of society. The Government of India has been receiving many complaints regarding malpractices in private clinical establishments, particularly large multi-specialty hospitals and corporate establishments. Patients admitted in hospitals are often forced to avail of in-house diagnostics services and to purchase medicines, consumables and implants from select vendors. These are sold with hefty profit margins ranging from 100 per cent to 1,737 per cent according to a study by the National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA), Government of India.

Lack of Standard Treatment Protocols leads to widespread irrational and unnecessary treatments, tests and procedures. Vulnerable patients and their families complain about lack of transparency in treatment, of medical negligence, violation of the patients’ rights and the frustration of facing an opaque and biased system of redressal, which often does not give them justice. The health-care sector is disproportionately prone to market failure, which can only be curbed by effective and comprehensive regulation in public interest.

It has long been recognised across the world that the delivery of health care should not be organised as a purely commercial activity, dictated…

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A study supported by the Indian Council of Medical Research has estimated that 101.3 million people in the country, or 11.4% of the population, are likely to have diabetes.

It also said that 136 million people in India, or 15.3% of the population, could be living with pre-diabetes.

Pre-diabetes is a condition in which a person’s blood sugar levels are higher than normal but not enough to be classified as diabetes.

The study, published in The Lancet Diabetes and Endocrinology medical journal, sought to quantify the prevalence of metabolic non-communicable diseases in India. Metabolism refers to a set of chemical reactions in the body that change food into energy.

M Anjana, the lead author of the study and managing director at Dr Mohan’s Diabetes Specialties Centre, said that pre-diabetes levels were higher in states in which the current prevalence of diabetes was low, The Indian Express reported.

“It is a ticking time bomb,” she said. “If you have pre-diabetes, conversion to diabetes is very, very fast in our population; more than 60% of people with pre-diabetes end up converting to diabetes in the next five years.”

The research also said that 39.5% of those who took part in the study had abdominal obesity, while 28.6% had generalized obesity.

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One of the most common stereotypes about the human past is that men did the hunting while women did the gathering. That gendered division of labor, the story goes, would have provided the meat and plant foods people needed to survive.

That characterization of our time as a species exclusively reliant on wild foods – before people started domesticating plants and animals more than 10,000 years ago – matches the pattern anthropologists observed among hunter-gatherers during the 19th and early 20th centuries. Virtually all of the large-game hunting they documented was performed by men.

It’s an open question whether these ethnographic accounts of labor are truly representative of recent hunter-gatherers’ subsistence behaviors. Regardless, they definitely fueled assumptions that a gendered division of labor arose early in our species’ evolution. Current employment statistics do little to disrupt that thinking; in a recent analysis, just 13% of hunters, fishers and trappers in the US were women.

Still, as an archaeologist, I’ve spent much of my career studying how people of the past got their food. I can’t always square my observations with the “man the hunter” stereotype.

Anthropological assumptions

First, I want to note that this article uses “women” to describe people biologically equipped to experience pregnancy, while recognising that not all people who identify as women are so equipped.

नयी दिल्ली। देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 235 नये मामले सामने आये और दो लोगों की इस बीमारी से मौत हो गयी।

इस बीच, देश में कोरोना टीकाकरण भी जारी है और पिछले 24 घंटों में 310 लोगों को टीका लगाया गया है। अब तक देश में 2,20,67,12,538 लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है।स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शनिवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल संक्रमितों की संख्या 4,49,91,380 हो गयी है।

सक्रिय मामलों की संख्या 234 घटकर 3502 रह गयी है। वहीं मृतकों की संख्या बढ़कर 531878 हो गयी है। इसी अवधि में कोरोना संक्रमण से स्वस्थ होने वालों का आंकड़ा 467 बढ़कर 44456000 पर पहुंच गया है।देश में पिछले 24 घंटों के दौरान राजस्थान और सिक्किम में सक्रिय मामलों की संख्या में चार-चार की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, दिल्ली और ओडिशा में तीन-तीन, त्रिपुरा में एक मामला बढ़ा है।

पिछले 24 घंटे में बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, गोवा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम, नागालैंड, पुड्डुचेरी, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में कोरोना के मामलों में कमी पायी गयी है। इसके अलावा, दिल्ली और कर्नाटक में इस बीमारी से एक-एक मरीज की मौत हुई है।

Pc:ABP News

The unpreparedness of healthcare establishments to protect workers from occupational hazards came into sharp focus during the Covid-19 pandemic. Nurses and sanitation workers drew attention to the lack of basic facilities like gloves, drinking water, and access to toilets.

The pandemic shed light on the challenges that healthcare workers routinely face: long working hours, high workloads, exposure to infectious diseases, hazardous chemicals, mental and physical strain. Adding to this are the psychosocial hazards such as fatigue, occupational burnout, distress or declining mental health, which affect the health and quality of work of healthcare workers.

Approximately 1,800 doctors died from Covid-19, the Indian Medical Association has estimated. As of September 22, data from the Union Ministry of Health and Family Welfare, indicates that 974 health workers had died from the virus.

But despite the significant risks that healthcare workers face there is no specific legislation to protect their occupational health and safety – apart from one narrowly applicable law in the context of HIV, the human immunodeficiency virus that causes AIDS, or acquired immunodeficiency syndrome.

The Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020, is the overarching legal framework that determines work standards in India. It addresses the health and safety concerns of factory and mine workers but fails to provide recourse…

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